न जाने किस उधेड़बुन में लगा है मन
न जाने कौन से ख्यालों में उलझे हैं नैन
पर इतना पता है कि आज दिल है बेचैन
क्यों बेचैन है यह, नहीं पता कुछ मुझे
पर इतनी खबर है कि मची है कुछ हलचल
पूछ रही हूँ खुद से क्यों मची है उथल पुथल
दिल की इस बेचैनी का कहाँ से लाऊं कोई हल
दिल में एक अजीब शोर सा मचा है,
कौन जाने क्या है कारण
जानती हूँ बस इतना कोई तो बता दे
मुझे इस बेचैनी का हल
दिल की इस बेचैनी में खोया है
मेरी ज़िन्दगी का हर एक पल
हर एक लम्हा पूछ रहा है मुझसे
आखिर क्यों है यह इतना बेकल
धड़क रहा है क्यों इतनी बेचैनी से
आखिर कहाँ खोया है इसका चैन
कोई तो बता दे मुझे, क्या समझाऊं
मैं इस पागल को अपनी नादानी से
नादां इस दिल की बेचैनी है बहुत
मेरे पास नहीं है कोई भी उत्तर
कोई बतला सके तो बटला दे
आखिर कैसे दूं इसको राहत
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